शिवम् - नाबालिगों का संबंध स्थापित करना सही है या गलत, यह एक अलग सवाल है. लेकिन सहमति से स्थापित संबंध को बलात्कार की श्रेणी में डालना अनुचित ही नहीं, बल्कि अन्याय भी है. -
बलात्कार व महिलाओं पर अत्याचार संबंधी कानूनों में प्रस्तावित संशोधनों को लेकर देश में बहस छिड़ गयी है. इसमें एक संशोधन को विरोध के बाद सरकार ने फिलहाल टाल दिया है. वह है यौन संबंध के लिए लड़की की सहमति की उम्र को 18 से घटा कर 16 करना. लोगों को लगा कि ऐसा करके सरकार छोटी उम्र में यौनाचार और यौन-स्वच्छंदता को इजाजत और बढ़ावा देने का काम कर रही है. लेकिन यह विरोध कुछ हद तक गलतफहमी पर आधारित है.
वर्तमान में कानून की स्थिति इस प्रकार है- यदि शादी के बगैर किसी नाबालिग लड़की (18 साल से कम उम्र) के साथ कोई भी पुरुष शारीरिक संबंध स्थापित करता है और इसके बारे में लड़की के माता-पिता या अन्य परिजन थाने में रपट लिखाते हैं, तो उसे बलात्कार माना जाता है. भले ही संबंध उस लड़की की सहमति से हुआ हो, लड़की इस बात को कहे, तो भी उस को बलात्कार ही माना जाता है.
इसके पीछे तर्क यह है कि वह लड़की नाबालिग है और सहमति देने के लिए परिपक्व नहीं है तथा यह सहमति उसे बहला-फुसला-डरा कर ली जा सकती है. इसलिए उसकी सहमति के कोई मायने नहीं हैं.
लेकिन इसका नतीजा क्या हो रहा है? कई बार लड़का-लड़की भाग जाते हैं, माता-पिता थाने में रपट लिखाते हैं, उनको पकड़ कर वापस लाया जाता है, लड़की को मार-पीट कर घर में कैद कर दिया जाता है, और लड़के को बलात्कार के जुर्म में जेल में डाल दिया जाता है.
लड़की लाख कहे कि वह लड़के से प्रेम करती है और अपनी इच्छा से उसके साथ गयी थी, कानून में उसकी बात नहीं सुनी जाती है, क्योंकि वह नाबालिग है. नाबालिगों का प्यार करना व शारीरिक संबंध स्थापित करना सही है या गलत, यह एक अलग सवाल है. लेकिन जो बलात्कार नहीं है और परस्पर सहमति से स्थापित संबंध को बलात्कार की श्रेणी में डालना अनुचित ही नहीं, बल्कि अन्याय भी है. हमें प्यार और बलात्कार में फर्क करना ही होगा.
बलात्कार का कानून कठोर होने के कारण इसमें जमानत भी आसानी से नहीं होती है. अब यदि सरकार इसको और कठोर बना रही है, तब तो इस विसंगति को दूर करने की ज्यादा जरूरत है. जो बलात्कारी नहीं है, उसे इस तरह बलात्कार के जुर्म में सजा दी जायेगी, तो जो वास्तव में बलात्कार होते हैं, उनके बारे में भी एक भ्रम फैलता है. लोगों को लगता है कि वह भी शायद ऐसा ही सहमति का मामला होगा. कानून के गलत उपयोग से कानून की विश्वसनीयता कम होती है.
यह ठीक है कि कम उम्र में लड़के-लड़कियों द्वारा शारीरिक संबंध बनाना अच्छी बात नहीं है. उनके बीच में दोस्ती और मेलजोल हो, लेकिन वे पढ़े-लिखें, समझदार बनें, अपने पैरों पर खड़ें हों और तब अपने जीवन साथी के बारे में फैसला करें, तो ही बेहतर है. कम उम्र में, तात्कालिक आवेग में, लिये गये फैसले गलत और दुखदायी हो सकते हैं. लेकिन इसके लिए समाज में वैसा माहौल, मर्यादाएं और परंपराएं बनानी होगी.
यह भी जरूरी है कि जिस तरह के अश्लील, कामुक व कामोत्तेजक विज्ञापन, साहित्य, टीवी धारावाहिक, फिल्मी दृश्य, इंटरनेट सामग्री प्रचलन में हैं, उन पर रोक लगे. बच्चों को अच्छे संस्कार दिये जायें. फिर भी ऐसा होता है, तो उस पर बलात्कार का कानून लगाना कहां तक उचित है? फिर तो हम हरियाणा की खाप पंचायतों और तालिबानी समाज जैसा काम कर रहे हैं.
अमेरिका और यूरोप के पश्चिमी समाजों में जो यौन स्वच्छंदता है, उसका भी समर्थन नहीं किया जा सकता. वहां पर शारीरिक संबंधों को बहुत हल्के ढंग से लिया जाता है. वह एक भोगप्रधान संस्कृति है. हम उसके भी दुष्परिणाम देख रहे हैं. कुछ अराजकतावादी और नारीवादी अब परिवार नाम की संस्था को ही खत्म करना चाहते हैं.
यह सही है कि परिवार के वर्तमान ढांचे में काफी गैरबराबरी, शोषण और घुटन है. इन दोषों को दूर करके एक नया ढांचा बनाने की जरूरत है. खास कर बच्चों के लालन-पालन के लिए (और बुजुर्गों की देखभाल के लिए भी) परिवार की जरूरत है और रहेगी. आंगनबाड़ियों, झूलाघरों और वृद्घाश्रमों की पर्याप्त व्यवस्था समाज करे, तो भी शायद वे परिवार का पूरा विकल्प कभी नहीं बन पायेंगे.
पश्चिमी समाज में बार-बार तलाक आम बात है. इसका बच्चों पर असर पड़ता है. लेकिन इससे उलट भारत में कई बार पति-पत्नी में बिल्कुल नहीं बनती, या पत्नी पर अत्याचार होता है, तो भी वह सहती रहती है. ऐसे में तलाक लेकर नया जीवन शुरू करना अच्छा है. यदि परिवार रूपी संस्था को बचाना है, तो उसमें शोषण और विषमता को दूर करने के उपाय करने होंगे.
Saturday, March 23, 2013
छोटी उम्र में यौनाचार सही या गलत ?
शिवम् - नाबालिगों का संबंध स्थापित करना सही है या गलत, यह एक अलग सवाल है. लेकिन सहमति से स्थापित संबंध को बलात्कार की श्रेणी में डालना अनुचित ही नहीं, बल्कि अन्याय भी है. -
बलात्कार व महिलाओं पर अत्याचार संबंधी कानूनों में प्रस्तावित संशोधनों को लेकर देश में बहस छिड़ गयी है. इसमें एक संशोधन को विरोध के बाद सरकार ने फिलहाल टाल दिया है. वह है यौन संबंध के लिए लड़की की सहमति की उम्र को 18 से घटा कर 16 करना. लोगों को लगा कि ऐसा करके सरकार छोटी उम्र में यौनाचार और यौन-स्वच्छंदता को इजाजत और बढ़ावा देने का काम कर रही है. लेकिन यह विरोध कुछ हद तक गलतफहमी पर आधारित है.
वर्तमान में कानून की स्थिति इस प्रकार है- यदि शादी के बगैर किसी नाबालिग लड़की (18 साल से कम उम्र) के साथ कोई भी पुरुष शारीरिक संबंध स्थापित करता है और इसके बारे में लड़की के माता-पिता या अन्य परिजन थाने में रपट लिखाते हैं, तो उसे बलात्कार माना जाता है. भले ही संबंध उस लड़की की सहमति से हुआ हो, लड़की इस बात को कहे, तो भी उस को बलात्कार ही माना जाता है.
इसके पीछे तर्क यह है कि वह लड़की नाबालिग है और सहमति देने के लिए परिपक्व नहीं है तथा यह सहमति उसे बहला-फुसला-डरा कर ली जा सकती है. इसलिए उसकी सहमति के कोई मायने नहीं हैं.
लेकिन इसका नतीजा क्या हो रहा है? कई बार लड़का-लड़की भाग जाते हैं, माता-पिता थाने में रपट लिखाते हैं, उनको पकड़ कर वापस लाया जाता है, लड़की को मार-पीट कर घर में कैद कर दिया जाता है, और लड़के को बलात्कार के जुर्म में जेल में डाल दिया जाता है.
लड़की लाख कहे कि वह लड़के से प्रेम करती है और अपनी इच्छा से उसके साथ गयी थी, कानून में उसकी बात नहीं सुनी जाती है, क्योंकि वह नाबालिग है. नाबालिगों का प्यार करना व शारीरिक संबंध स्थापित करना सही है या गलत, यह एक अलग सवाल है. लेकिन जो बलात्कार नहीं है और परस्पर सहमति से स्थापित संबंध को बलात्कार की श्रेणी में डालना अनुचित ही नहीं, बल्कि अन्याय भी है. हमें प्यार और बलात्कार में फर्क करना ही होगा.
बलात्कार का कानून कठोर होने के कारण इसमें जमानत भी आसानी से नहीं होती है. अब यदि सरकार इसको और कठोर बना रही है, तब तो इस विसंगति को दूर करने की ज्यादा जरूरत है. जो बलात्कारी नहीं है, उसे इस तरह बलात्कार के जुर्म में सजा दी जायेगी, तो जो वास्तव में बलात्कार होते हैं, उनके बारे में भी एक भ्रम फैलता है. लोगों को लगता है कि वह भी शायद ऐसा ही सहमति का मामला होगा. कानून के गलत उपयोग से कानून की विश्वसनीयता कम होती है.
यह ठीक है कि कम उम्र में लड़के-लड़कियों द्वारा शारीरिक संबंध बनाना अच्छी बात नहीं है. उनके बीच में दोस्ती और मेलजोल हो, लेकिन वे पढ़े-लिखें, समझदार बनें, अपने पैरों पर खड़ें हों और तब अपने जीवन साथी के बारे में फैसला करें, तो ही बेहतर है. कम उम्र में, तात्कालिक आवेग में, लिये गये फैसले गलत और दुखदायी हो सकते हैं. लेकिन इसके लिए समाज में वैसा माहौल, मर्यादाएं और परंपराएं बनानी होगी.
यह भी जरूरी है कि जिस तरह के अश्लील, कामुक व कामोत्तेजक विज्ञापन, साहित्य, टीवी धारावाहिक, फिल्मी दृश्य, इंटरनेट सामग्री प्रचलन में हैं, उन पर रोक लगे. बच्चों को अच्छे संस्कार दिये जायें. फिर भी ऐसा होता है, तो उस पर बलात्कार का कानून लगाना कहां तक उचित है? फिर तो हम हरियाणा की खाप पंचायतों और तालिबानी समाज जैसा काम कर रहे हैं.
अमेरिका और यूरोप के पश्चिमी समाजों में जो यौन स्वच्छंदता है, उसका भी समर्थन नहीं किया जा सकता. वहां पर शारीरिक संबंधों को बहुत हल्के ढंग से लिया जाता है. वह एक भोगप्रधान संस्कृति है. हम उसके भी दुष्परिणाम देख रहे हैं. कुछ अराजकतावादी और नारीवादी अब परिवार नाम की संस्था को ही खत्म करना चाहते हैं.
यह सही है कि परिवार के वर्तमान ढांचे में काफी गैरबराबरी, शोषण और घुटन है. इन दोषों को दूर करके एक नया ढांचा बनाने की जरूरत है. खास कर बच्चों के लालन-पालन के लिए (और बुजुर्गों की देखभाल के लिए भी) परिवार की जरूरत है और रहेगी. आंगनबाड़ियों, झूलाघरों और वृद्घाश्रमों की पर्याप्त व्यवस्था समाज करे, तो भी शायद वे परिवार का पूरा विकल्प कभी नहीं बन पायेंगे.
पश्चिमी समाज में बार-बार तलाक आम बात है. इसका बच्चों पर असर पड़ता है. लेकिन इससे उलट भारत में कई बार पति-पत्नी में बिल्कुल नहीं बनती, या पत्नी पर अत्याचार होता है, तो भी वह सहती रहती है. ऐसे में तलाक लेकर नया जीवन शुरू करना अच्छा है. यदि परिवार रूपी संस्था को बचाना है, तो उसमें शोषण और विषमता को दूर करने के उपाय करने होंगे.
Monday, November 12, 2012
अब मोबाइल से जलेगी घर की लाइट, पानी की मोटर
अब अगर आपको अपने पानी की मोटर को चलाना है या घर के लाइट को जलाना है तो आपको बोर्ड तक जाने की जरूरत नहीं है.
आप कही भी रहे, अपने मोबाइल से मोटर चालु कर सकते है तथा लाइट को जला सकते है.
हैरानी की बात तो यह है कि इस प्रणाली की खोज बड़े शहरों मे रिसर्च करने वाले वैज्ञानिकों के सुविधायुक्त व महंगे लैबो में नही हुई है, बल्की इसका आविष्कार किया है गढ़वा के रहने वाले एसएसजेएस कॉलेज के 11वीं का छात्र प्रभाकर चैबे ने.
प्रभाकर अपने घर के एक छोटे से कमरे में ही अपने वैज्ञानीक दिमाग से इस प्रकार की ढेरो प्रणाली विकसीत करता रहता है. इस तरह की अनोखी चीजों को देख सभी आश्चर्य हो जाते है.
प्रभाकर को अपने आस-पास पड़े बेकार तार तथा जर्जर हो चुके मोबाइल सेट को लेकर रोज आविष्कार करने की आदत कक्षा सात से ही है.
प्रभाकर ने मोबाइल से मिस कॉल देकर मोटर चालु करना, रिमोट कंट्रोल लाइट, पायदान पर पांव रखते ही लाइट का जलना के साथ और कई खोजे की है.
प्रभाकर ने मोटर चालु करने के लिए स्वीच बोर्ड के पास एक नंबर का सिम लगा रखा है जिसपर किसी भी मोबाइल से मिस कॉल देते ही मोटर चालु हो जाता है चाहे आप कही भी हो.
प्रभाकर ने बताया की उसने एक सप्ताह पुर्व फिलिप्स कंपनी का विज्ञापन पढ़ा था. उसने बताया की कंपनी इस तकनीक से लगभग 15 से 20 हजार रूपये की मुल्य पर बाजार मे लाने की योजना बना रही है.
उसी तकनीक को प्रभाकर ने 700 के लागत में तैयार कर दिया है.
हांलाकी प्रभाकर को अपना हुनर दिखाने के लिए कहीं भी विज्ञान प्रदर्षनी में अब तक मौका नही मिला हैं लेकीन पावर इलेक्ट्रॉनीक इंजीनीयर बनने का लक्ष्य प्रभाकर ने जरूर रखा है.
तंबाकू निषेध के लिए राजस्व का मोह छोड़ना होगा ?
तंबाकू के इस्तेमाल से होने वाली जानलेवा बीमारियों के रोजाना बढ़ते प्रकोप के मद्देनजर सरकार की ओर से यह स्वीकार किया गया है कि इस समस्या से निपटने की राह में राजस्व का मोह बडी बाधा है। जॉन हॉपकिंग्स ब्लूमबर्ग स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ और केन्द्र सरकार की ओर से आयोजित अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में भारत सहित अन्य विकासशील देशों में तंबाकू जनित बीमारियों के बेलगाम होते प्रकोप पर चिंता जताई गई। केन्द्र और राज्य सरकारों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में दो दिन तक ले सम्मेलन के अंत में शनिवार को पारित प्रस्ताव में कहा गया कि इस समस्या से निपटने के लिए सभी राज्यों को एक साथ मिलकर तंबाकू उत्पादों के इस्तेमाल पर रोक लगानी होगी।
सम्मेलन में मौजूद बिहार के शिक्षा मंत्री पी के शाही ने कहा कि उनके राज्य में तंबाकू निषेध के लिए चलाए जा रहे जागरूकता अभियान की कामयाबी में शैक्षिक एवं सामाजिक पिछड़ापन सबसे बड़ी बाधा है। इसके अलावा उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि तंबाकू उत्पादों पर प्रतबिंध के लिए किसी एक राज्य को नहीं बल्कि केन्द्र सरकार को नेतृत्व की भूमिका स्वीकार कर एक साथ पूरे देश में प्रतबिंध लगाना पड़ेगा तभी यह कारगर तौर पर लागू हो पाएगा।
इस दौरान दिल्ली के खाद्य सुरक्षा आयुक्त केजेआर बर्मन ने राजधानी में दो महीने पहले ही तंबाकू उत्पादों पर लागू किए गए प्रतबिंध का हवाला देते हुए बताया कि हर संभव सख्ती के बावजूद प्रतबिंध का असर शुरुआती ही रहा। उन्होंने कहा कि पड़ोसी राज्यों से होने वाली तस्करी को रोकना प्रतबिंध की सबसे बड़ी व्यवहारिक चुनौती है। उन्होंने कहा कि ऐसे हालात में जागरूकता अभियान भी बेअसर साबित होते हैं। उत्तराखंड के स्वास्थ्य मंत्री सुरेन्द्र सिंह नेगी ने कहा कि उनके राज्य में तंबाकू उत्पादों पर प्रतबिंध की राह में सबसे बड़ी बाधा राजस्व की हानि के रूप में सामने आई।
नेगी ने कहा कि लगभग 20 करोड़ रुपये प्रतिदिन राजस्व की हानि को सरकार के सहयोगी मंत्री ही स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं थे। हालांकि हॉपकिंग्स स्कूल के वैज्ञानिक बेन लोजारे ने प्रभावशाली ढंग से सरकारी प्रतिनिधियों को यह मानने पर मजबूर कर दिया सरकार को पहले यह तय करना पड़ेगा कि उनके लिए जनस्वास्थ्य जरूरी है या राजस्व। उन्होंने प्रबंधन के सूत्रों का हवाला देकर कहा कि भारत में सरकारों की इच्छा शक्ति की कमी सबसे बड़ी बाधा है, किसी भी सरकार के लिए राजस्व हानि की भरपाई के लिए तमाम रास्ते होते हैं।
उन्होंने कहा कि आपको अपने ही देश के राज्य केरल से इस बारे में सीखना चाहिए जिसने राजस्व हानि और पड़ोसी राज्यों द्वारा तंबाकू उत्पादों पर प्रतबिंध न लगाने जैसी दलीलों को दरकिनार कर तंबाकू नियंत्रण के लिए इच्छा शक्ति दिखाई है। सेमिनार के अंत में राज्य और केन्द्र सरकारों के प्रतिनिधियों ने माना कि राजस्व हानि बड़ी बाधा नहीं है। साथ ही सुझाव दिया गया कि केन्द्र सरकार की पहल पर तंबाकू उत्पादों के इसतेमाल पर सामूहिक प्रतबिंध लगाना चाहिए तभी यह कारगर हो सकेगा।
Thursday, October 18, 2012
सम्मान स्वीकारने पर गिलार्ड ने सचिन को कहा थैंक यू
नई दिल्ली। ऑस्ट्रेलिया की
प्रधानमंत्री जूलिया गिलार्ड ने मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर को उनके देश
का प्रतिष्ठित सम्मान (आर्डर आफ ऑस्ट्रेलिया) स्वीकार करने पर धन्यवाद
दिया है।
गिलार्ड
ने बुधवार को भारतीय उद्योग जगत को संबोधित करते हुए कहा कि क्रिकेट में
अपनी उपलब्धियों के कारण सचिन ऑस्ट्रेलिया में बेहद लोकप्रिय हैं और इस साल
की शुरुआत में टीम इंडिया के ऑस्ट्रेलिया दौरे में सचिन को खेलते देखने के
लिए काफी दर्शक जुटे थे।
उन्होंने
कहा कि इस साल की शुरुआत में मुझे सिडनी में अपने निवास पर भारतीय और
ऑस्ट्रेलियाई टीमों की मेजबानी करने का सौभाग्य मिला। इस खेल ने दोनों
देशों के बीच संबंधों को मजबूत किया है। सचिन को शायद अंतिम बार
ऑस्ट्रेलिया में टेस्ट खेलते देखने के लिए भारी भीड़ जुटी थी।
ऑस्ट्रेलियाई
प्रधानमंत्री ने कहा कि हमें इस बात की खुशी है कि सचिन ने ऑस्ट्रेलियाई
लोगों द्वारा दिए गए सम्मान (आर्डर आफ ऑस्ट्रेलिया) स्वीकार कर लिया है।
गौरतलब है कि गिलार्ड ने मंगलवार को सचिन को यह सम्मान देने की घोषणा की
थी। हालांकि उनके ही देश के एक सांसद ने सचिन को यह पुरस्कार देने का विरोध
भी किया है।
Thursday, August 23, 2012
आने वाले कल की 'दीवार' चेतेश्वर पुजारा का सफर
हैदराबाद: चेतेश्वर पुजारा की बल्लेबाजी ने सबका दिल जीत लिया है और उनकी इस कामयाबी के बाद उन्हें टीम इंडिया का नया शूरवीर कहा जा रहा है. कुछ लोग उन्हें आने वाले कल की 'दीवार' बता रहे हैं तो कुछ की नजर में वे लक्ष्मण की तरह ही 'वेरी वेरी स्पेशल' है.राहुल द्रविड़ और वीवीएस लक्ष्मण ने टेस्ट मैचों को अलविदा कहा तो लगा था कि इनके जाने के बाद कैसे होगी टीम में भरपाई. कौन लेग इन दो बड़े नामी बल्लेबाज़ों की खाली जगह को, कौन होगा वो नया खिलाड़ी जो टीम इंडिया की नींव बनेगा. लगता है इन सारे सवालों के जवाब अब मिल गए हैं.
जी हां, 24 साल के चेतेश्वर ही वो नया नाम, जिसने टीम इंडिया को उम्मीदों का नया आसमान दिया है. न्यूजीलैंड के खिलाफ हैदराबाद टेस्ट में शानदार शतक लगाकर ये संदेश दिया है कि उन पर भरोसा किया जा सकता है.
पुजारी तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी करने उतरे, ठीक द्रविड़ की तरह और सधी हुई पारी खेलकर सबको अपना मुरीद बना लिया.
गौर करने वाली बात ये है कि चेतेश्वर पुजारा का ये चौथा टेस्ट है. 2010 में पुजारा को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ बैंगलोर टेस्ट में पहली बार खेलने का मौका मिला था. उस वक्त भी उन्होंने तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी करते हुए 72 रनों की पारी खेली थी. वो भी टेस्ट मैच की चौथी पारी में.
क्रिकेट पुजारा के खून में बसा है. चेतेश्वर पुजारा अरविंद पुजारा के बेटे हैं, जो रणजी की सौराष्ट्र टीम की ओर से 6 टेस्ट मैच खेल चुके हैं. चेतेश्नर के चाचा बिपिन पुजारा भी सौराष्ट्र की टीम का अहम हिस्सा रह चुके हैं. जाहिर है क्रिकेट उनके लिए किसी जुनून से कम नहीं है.
रणजी का रनवीर
चेतेश्वर पुजारा को रणजी का रनवीर भी कहा जाता है. 2007-08 रणजी सीजन में चेतेश्वर सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज में एक रहे हैं.
2008-09 रणजी ट्रॉफी में उन्होंने उड़ीसा के खिलाफ तिहरा शतक लगाया था. रणजी के पूरे रिकॉर्ड की बात करें तो रणजी में पुजारा ने अभी तक कुल 64 मैच खेले हैं. जिसमें उन्होंने 4639 रन बनाए हैं. रणजी में 14 शतक और 21 अर्धशतक उन्होंने अपने नाम किए हैं. 302 रन उनका सर्वाधिक स्कोर रहा है.
तिहरा शतक
पुजारा टीम इंडिया को अपनी बल्लेबाजी से नया हौसला दे रहे हैं. आपको बता दें कि 2006 के अंडर-19 वर्ल्ड कप में शतक लगा चुके हैं.
पूरे टूर्नामेंट में उन्होंने 349 रन अपने नाम किए थे. अंडर-19 में ही उन्होंने इंग्लैंड के खिलाफ दोहरा शतक जड़ा था. इसी वर्ल्ड कप में पुजारा ने वेस्टइंडीज के खिलाफ 97 और इंग्लैंड के खिलाफ 129 रनों की पारी खेली थी.
अंडर-14 में पुजारा ने खूब सुर्खियां बटोरी थी. जब बडौदा के खिलाफ उन्होंने तिहरा शतक ठोंक दिया था, जबकि अंडर-22 टूर्नामेंट में रहते हुए चेतेश्वर पुजारा दो तिहरे शतक लगा चुके हैं.
2008 के आईपीएल में शाहरुख की टीम कोलकाता नाइट राइडर्स ने उन्हें खरीदा था. इसी साल अक्टूबर में वो चैलेंजर ट्रॉफी के लिए चुन लिए गए थे, लेकिन उसके बाद पुजारा को लगी चोट से उनके करियर पर संकट के बादल मंडराने लगे थे, लेकिन जल्द ही वो इससे भी उबर गए और रणजी में महाराष्ट्र के खिलाफ दोहरा शतक लगाकर अपना हौसला वापस लिया और अब न्यूजीलैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज में वो खुद को साबित करने में जुटे हैं.
Monday, July 30, 2012
हर ओर गूंजा 'हर-हर महादेव'
नई दिल्ली: सावन के आखिरी सोमवार को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र सहित विभिन्न राज्यों के शिवालयों में शिव के दर्शन के लिए भक्त उमड़ पड़े। हर ओर 'हर-हर महादेव' और 'बोल बम' के जयकारे सुबह से शाम तक गूंजते रहे। किसी ने दूध से तो किसी ने गंगाजल से शिवलिंगों का अभिषेक किया।
दिल्ली, गाजियाबाद, नोएडा, फरीदाबाद और गुड़गांव के शिव मंदिरों में सुबह से ही भक्तों की कतार देखी गई। हरिद्वार से गंगाजल लेकर आए कांवड़ियों ने शिवलिंगों का जलाभिषेक किया। व्रती महिलाओं ने दूध, फूल, धतूड़ा और बेलपत्र चढ़ाकर भगवान शिव की पूजा-अर्चना की।
इसी तरह उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित विश्वप्रसिद्ध काशी विश्वनाथ मंदिर में हजारों की संख्या में दूर-दूर से आए श्रद्धालुओं ने भगवान शिव का जलाभिषेक किया। गंगा स्नान करने के बाद हाथ में बेलपत्र और दूध लेकर श्रद्धालुओं ने कतार में लगकर बारी-बारी से पूजा-अर्चना की।
लखनऊ के प्रसिद्ध मनकामेश्वर मंदिर, चौक का कोनेश्वर और ठाकुरगंज के गिरि मंदिर में सुबह से ही भक्तों का तांता देखा गया। भगवान भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए इन प्रसिद्ध मंदिरों में रूद्राभिषेक का आयोजन भी किया गया। इलाहाबाद, कानपुर, मेरठ, बरेली और गोरखपुर स्थित शिव मंदिर भी 'बोल बम' के नारों से गुंजायमान रहे। भक्तों ने बेलपत्र और दूध चढ़ाकर भोले की पूजा-अर्चना की।
बुंदेलखंड क्षेत्र के बांदा स्थित कालिंजर दुर्ग की सरगोह में विराजमान भगवान नीलकंठेश्वर के दर्शन के लिए भी सुबह से शाम तक श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। भीड़ को काबू में करने के लिए पुलिस को भारी मशक्कत करनी पड़ी।
कालिंजर दुर्ग की पुलिस चौकी के प्रभारी उपनिरीक्षक विनोद कुमार ने बताया कि दोपहर बाद करीब पचास हजार श्रद्धालु किले की सरगोह गुफा में भगवान नीलकंठेश्वर के दर्शन किए। उन्होंने बताया कि कालिंजर दुर्ग के अलावा बांदा, हमीरपुर, चित्रकूट और महोबा के विभिन्न शिव मंदिरों में भी श्रद्धालुओं ने भगवान भोलेनाथ की विधि-विधान से पूजा की।
उत्तर प्रदेश पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि भक्तों की भीड़ के मद्देनजर शिवालयों में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। काशी विश्वनाथ मंदिर में खास चौकसी बरतने के निर्देश दिए गए थे।
मध्य प्रदेश के तमाम शिवालयों में भी सावन के अंतिम सोमवार को भक्तों की भीड़ उमड़ी। देश के प्रमुख ज्योतिर्लिगों में से एक उज्जैन के महाकालेश्वर के दरबार में तड़के से ही श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही। मान्यता है कि सावन के सोमवार को महाकाल की पूजा करने से सभी कष्टों से मुक्ति मिलती है और सुख-समृद्धि आती है।
राजधानी भोपाल के विभिन्न शिवमंदिरों में भक्तों का सैलाब उमड़ा। श्रद्धालुओं ने शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र अर्पित कर आराधना की। राज्य के अन्य हिस्सों में भी शिवालयों में श्रद्धालुओं ने शिव की पूजा की।
झारखंड के बैद्यनाथ धाम में कामना ज्योतिर्लिग पर जलाभिषेक करने के लिए हजारों श्रद्धालु पहुंचे। भक्तों की भीड़ इतनी थी कि मंदिर से करीब नौ से 10 किलोमीटर तक लम्बी कतार लग गई। मंदिर प्रबंधन समिति का अनुमान है कि सोमवार को डेढ़ लाख से ज्यादा कांवड़ियों ने जलाभिषेक किया।
बैद्यनाथ धाम मंदिर प्रबंधन समिति के सचिव और देवघर जिले के उपायुक्त राहुल पुरवार ने बताया कि सुबह तीन बजे मंदिर के पट खुलने पर मुख्य पूजा के बाद दोपहर तक करीब 45 हजार से ज्यादा कांवड़िये यहां पहुंचकर बाबा का जलाभिषेक कर चुके थे। उन्होंने कहा कि कांवड़ियों की आठ से नौ किलोमीटर तक लम्बी कतार लगी हुई है तथा कांवड़ियों का आने का सिलसिला जारी है। मंदिर का पट श्रृंगार पूजा के बाद 11 बजे रात को बंद किया जाएगा।
समूचा देवघर कांवड़ियों से भर गया। चारों ओर 'बोल बम' के नारे गूंजते रहे। सुबह हुई मुख्य पूजा में केंद्रीय पर्यटन मंत्री सुबोधकांत सहाय भी शामिल हुए।
पुरवार ने कहा कि भक्तों की भारी भीड़ को देखते हुए सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध किए गए। अतिरिक्त पुलिस बलों को भी लगाया गया। सादे लिबास में महिला पुलिस बल को भी तैनात किया था।
दिल्ली, गाजियाबाद, नोएडा, फरीदाबाद और गुड़गांव के शिव मंदिरों में सुबह से ही भक्तों की कतार देखी गई। हरिद्वार से गंगाजल लेकर आए कांवड़ियों ने शिवलिंगों का जलाभिषेक किया। व्रती महिलाओं ने दूध, फूल, धतूड़ा और बेलपत्र चढ़ाकर भगवान शिव की पूजा-अर्चना की।
इसी तरह उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित विश्वप्रसिद्ध काशी विश्वनाथ मंदिर में हजारों की संख्या में दूर-दूर से आए श्रद्धालुओं ने भगवान शिव का जलाभिषेक किया। गंगा स्नान करने के बाद हाथ में बेलपत्र और दूध लेकर श्रद्धालुओं ने कतार में लगकर बारी-बारी से पूजा-अर्चना की।
लखनऊ के प्रसिद्ध मनकामेश्वर मंदिर, चौक का कोनेश्वर और ठाकुरगंज के गिरि मंदिर में सुबह से ही भक्तों का तांता देखा गया। भगवान भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए इन प्रसिद्ध मंदिरों में रूद्राभिषेक का आयोजन भी किया गया। इलाहाबाद, कानपुर, मेरठ, बरेली और गोरखपुर स्थित शिव मंदिर भी 'बोल बम' के नारों से गुंजायमान रहे। भक्तों ने बेलपत्र और दूध चढ़ाकर भोले की पूजा-अर्चना की।
बुंदेलखंड क्षेत्र के बांदा स्थित कालिंजर दुर्ग की सरगोह में विराजमान भगवान नीलकंठेश्वर के दर्शन के लिए भी सुबह से शाम तक श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। भीड़ को काबू में करने के लिए पुलिस को भारी मशक्कत करनी पड़ी।
कालिंजर दुर्ग की पुलिस चौकी के प्रभारी उपनिरीक्षक विनोद कुमार ने बताया कि दोपहर बाद करीब पचास हजार श्रद्धालु किले की सरगोह गुफा में भगवान नीलकंठेश्वर के दर्शन किए। उन्होंने बताया कि कालिंजर दुर्ग के अलावा बांदा, हमीरपुर, चित्रकूट और महोबा के विभिन्न शिव मंदिरों में भी श्रद्धालुओं ने भगवान भोलेनाथ की विधि-विधान से पूजा की।
उत्तर प्रदेश पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि भक्तों की भीड़ के मद्देनजर शिवालयों में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। काशी विश्वनाथ मंदिर में खास चौकसी बरतने के निर्देश दिए गए थे।
मध्य प्रदेश के तमाम शिवालयों में भी सावन के अंतिम सोमवार को भक्तों की भीड़ उमड़ी। देश के प्रमुख ज्योतिर्लिगों में से एक उज्जैन के महाकालेश्वर के दरबार में तड़के से ही श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही। मान्यता है कि सावन के सोमवार को महाकाल की पूजा करने से सभी कष्टों से मुक्ति मिलती है और सुख-समृद्धि आती है।
राजधानी भोपाल के विभिन्न शिवमंदिरों में भक्तों का सैलाब उमड़ा। श्रद्धालुओं ने शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र अर्पित कर आराधना की। राज्य के अन्य हिस्सों में भी शिवालयों में श्रद्धालुओं ने शिव की पूजा की।
झारखंड के बैद्यनाथ धाम में कामना ज्योतिर्लिग पर जलाभिषेक करने के लिए हजारों श्रद्धालु पहुंचे। भक्तों की भीड़ इतनी थी कि मंदिर से करीब नौ से 10 किलोमीटर तक लम्बी कतार लग गई। मंदिर प्रबंधन समिति का अनुमान है कि सोमवार को डेढ़ लाख से ज्यादा कांवड़ियों ने जलाभिषेक किया।
बैद्यनाथ धाम मंदिर प्रबंधन समिति के सचिव और देवघर जिले के उपायुक्त राहुल पुरवार ने बताया कि सुबह तीन बजे मंदिर के पट खुलने पर मुख्य पूजा के बाद दोपहर तक करीब 45 हजार से ज्यादा कांवड़िये यहां पहुंचकर बाबा का जलाभिषेक कर चुके थे। उन्होंने कहा कि कांवड़ियों की आठ से नौ किलोमीटर तक लम्बी कतार लगी हुई है तथा कांवड़ियों का आने का सिलसिला जारी है। मंदिर का पट श्रृंगार पूजा के बाद 11 बजे रात को बंद किया जाएगा।
समूचा देवघर कांवड़ियों से भर गया। चारों ओर 'बोल बम' के नारे गूंजते रहे। सुबह हुई मुख्य पूजा में केंद्रीय पर्यटन मंत्री सुबोधकांत सहाय भी शामिल हुए।
पुरवार ने कहा कि भक्तों की भारी भीड़ को देखते हुए सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध किए गए। अतिरिक्त पुलिस बलों को भी लगाया गया। सादे लिबास में महिला पुलिस बल को भी तैनात किया था।
Friday, April 13, 2012
HCL प्रमुख करेंगे मुख्यमंत्री अखिलेश से मुलाकात
लखनऊ: हिंदुस्तान कम्प्यूटर्स लिमिटेड (एचसीएल) के संस्थापक एंव अध्यक्ष शिव नाडर सोमवार को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से मुलाकात कर सूचना प्रौद्योगिकी एंव शिक्षा विषयों पर चर्चा करेंगे।
समाजवादी पार्टी (सपा) सरकार ने अपने घोषणापत्र में छात्रों को लैपटॉप और टैबलेट मुफ्त देने का वादा किया था। माना जा रहा है कि दोपहर बाद मुख्यमंत्री अखिलेश से होने वाली मुलाकात में नाडर राज्य सरकार की इस योजना में सहयोग की पेशकश कर सकते हैं।
शिक्षा के क्षेत्र में नया प्रयोग करते हुए नाडर ने उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर, नोएडा और सीतापुर जिलों में विद्या ज्ञान स्कूल शुरू किए हैं, जहां गांवों के गरीब व मेधावी बच्चों का चयन कर उनकी पढ़ाई व रहने-खाने का खर्च उठाया जाता है। नाडर कई और जिलों में इस तरह से स्कूल खोलना चाहते हैं। इस बाबत भी वह मुख्यमंत्री से चर्चा करेंगे।
समाजवादी पार्टी (सपा) सरकार ने अपने घोषणापत्र में छात्रों को लैपटॉप और टैबलेट मुफ्त देने का वादा किया था। माना जा रहा है कि दोपहर बाद मुख्यमंत्री अखिलेश से होने वाली मुलाकात में नाडर राज्य सरकार की इस योजना में सहयोग की पेशकश कर सकते हैं।
शिक्षा के क्षेत्र में नया प्रयोग करते हुए नाडर ने उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर, नोएडा और सीतापुर जिलों में विद्या ज्ञान स्कूल शुरू किए हैं, जहां गांवों के गरीब व मेधावी बच्चों का चयन कर उनकी पढ़ाई व रहने-खाने का खर्च उठाया जाता है। नाडर कई और जिलों में इस तरह से स्कूल खोलना चाहते हैं। इस बाबत भी वह मुख्यमंत्री से चर्चा करेंगे।
Friday, July 29, 2011
ताकि जिंदगी में कभी न हो अफसोस
शिवम् : फिल्म : जिंदगी न मिलेगी दोबारा
कलाकार : कल्की कोचिन, रितिक रोशन, कर्ट्रीना कैफ, फरहान अख्तर, अभय देओल
निर्देशक : जोया अख्तर
रेटिंग : 3.5 -5

जिंदगी न मिलेगी दोबारा हमें जिंदगी में किसी भी बात का अफसोस न करने की सीख देती है। वह बताती है कि कैसे आप अपने आज को खुशहाल बना कर भविष्य को भी सुरक्षित और खुशियों से भरपूर बना सकते हैं। जिंदगी न मिलेगी दोबार उन आजाद परिंदों के इर्द-गिर्द घूमती है, जिनकी जिंदगी में अपनी अपनी कुछ परेशानियां हैं।
लेकिन इसके बावजूद वे उसे छुपा कर नये तरीके से अपनी जिंदगी जीना चाहते हैं। जिंदगी के हर स्वाद का मजा कैसे लिया जाता है। यह फिल्म के तीन किरदारों को देख कर आप अनुमान लगा सकते हैं। फिल्म जिंदगी न मिलेगी दोबारा जिंदगी में दोस्ती, प्यार व परिवार की अहमियत की कहानी है। दोस्ती की अहमियत जिंदगी में क्या होती है। फिल्म दर्शाती है।
आप भले ही कितनी भी दूर रहें। लेकिन सच्चे दोस्त आपकी परेशानी समझ लेते हैं। और उन्हें सुलझाने की कोशिश भी करते हैं। एक बिंदास, बेफिक्र दोस्ती की कहानी है जिंदगी। कोई दिखावापन नहीं, इस फिल्म की सबसे बड़ी खूबी है। फिल्म में दो दोस्तों के बीच हुई गलतफहमियों की वजह से आये दो दोस्तों के खटास को केवल संवादों के हवाले से ही समझाने की कोशिश की गयी है।
उन पर आधारित दृश्य जबरन नहीं दर्शाये गये हैं। फिल्म की कहानी तीन दोस्तों के बीच की है। इमरान, अर्जुन, कबीर। तीनों स्कूल के दोस्त हैं। तीनों एक दूसरे से संपर्क में हैं। लेकिन मिलते नहीं। लेकिन उन्होंने स्कूल में एक रुल बनाया था कि वे एक टि्रप पर जायेंगे। और रूल कोई नहीं तोड़ेगा। कबीर परिवार के दबाव में नताशा से सगाई कर चुका है।
फिर भी वह अपने दोस्तों के साथ टि्रप पर जाता है। इमरान लेखक है। और अपने वास्तविक पिता की तलाश में है। अर्जुन करियर व शोहरत की चाहत में सबकुछ गंवा चुका एक निराश व्यक्ति। तीनों टि्रप के लिए स्पेन चुनते हैं। वहां उन्हें लैला मिलती है। लैला से मिलने के बाद अर्जुन जिंदगी में अपने हर डर को भूल जाता है।
इमरान को अपने वास्तविक पिता की तलाश है, जो उसे स्पेन में मिलते हैं। इस सफर में वे हर काम करते हैं जिनसे वे डरते हैं। तीनों के मन से डर निकालने के लिए निर्देशक ने तीन अलग अलग एडवेंचर्स टास्क चुने हैं। सी वॉटर में जाना, ऊंचाई में सैर करना और सांड़ के रेस में भाग लेना। सभी रोमांचित लेकिन कठिनाइयों से भरे टास्क होते हैं और वे उन्हें जीते हैं।
जोया अख्तर ने बतौर निर्देशिका फिल्म में कहीं भी बोर होने का मौका नहीं दिया है। इमरान के रूप में फरहान एक बेहद शरारती इंसान है। और उसकी हरकतें दर्शकों का खूब मनोरंजन करती है। कबीर के रूप में अभय ने बेहद संजीदगी से अपना किरदार निभाया है। रितिक ने बेहतरीन अभिनय तो किया है। कै टरीना ने रोमांचित लड़की के रूप में फिट बैठी हैं। कल्की ने अपने हिस्से का किरदार बखूबी निभाया है। फिल्म के हर दृश्य में आप महसूस करेंगे कि आप स्पेन अपनी छुट्टियां बीताने आये हैं। फिल्म के टोमटिना फेस्टिवल पर आधारित गीत दर्शकों को जरूर लुभाने में कामयाब रहेगा। फरहान अख्तर की हरकतों, शरारतों व मस्ती भरे अंदाज के साथ उनका शायराना अंदाज भी दर्शकों को जरूर लुभायेगा। फिल्म के गीतों में जहां भी डांसिंग स्टेप्स की बात आयी है, वहां रितिक ने अपने कदम ताल का कमाल दिखाया है। गीत सेनोरिटा में भी तीनों दोस्ती की बांडिंग कमाल की है।
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निर्देशक : जोया अख्तर
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जिंदगी न मिलेगी दोबारा हमें जिंदगी में किसी भी बात का अफसोस न करने की सीख देती है। वह बताती है कि कैसे आप अपने आज को खुशहाल बना कर भविष्य को भी सुरक्षित और खुशियों से भरपूर बना सकते हैं। जिंदगी न मिलेगी दोबार उन आजाद परिंदों के इर्द-गिर्द घूमती है, जिनकी जिंदगी में अपनी अपनी कुछ परेशानियां हैं।
लेकिन इसके बावजूद वे उसे छुपा कर नये तरीके से अपनी जिंदगी जीना चाहते हैं। जिंदगी के हर स्वाद का मजा कैसे लिया जाता है। यह फिल्म के तीन किरदारों को देख कर आप अनुमान लगा सकते हैं। फिल्म जिंदगी न मिलेगी दोबारा जिंदगी में दोस्ती, प्यार व परिवार की अहमियत की कहानी है। दोस्ती की अहमियत जिंदगी में क्या होती है। फिल्म दर्शाती है।
आप भले ही कितनी भी दूर रहें। लेकिन सच्चे दोस्त आपकी परेशानी समझ लेते हैं। और उन्हें सुलझाने की कोशिश भी करते हैं। एक बिंदास, बेफिक्र दोस्ती की कहानी है जिंदगी। कोई दिखावापन नहीं, इस फिल्म की सबसे बड़ी खूबी है। फिल्म में दो दोस्तों के बीच हुई गलतफहमियों की वजह से आये दो दोस्तों के खटास को केवल संवादों के हवाले से ही समझाने की कोशिश की गयी है।
उन पर आधारित दृश्य जबरन नहीं दर्शाये गये हैं। फिल्म की कहानी तीन दोस्तों के बीच की है। इमरान, अर्जुन, कबीर। तीनों स्कूल के दोस्त हैं। तीनों एक दूसरे से संपर्क में हैं। लेकिन मिलते नहीं। लेकिन उन्होंने स्कूल में एक रुल बनाया था कि वे एक टि्रप पर जायेंगे। और रूल कोई नहीं तोड़ेगा। कबीर परिवार के दबाव में नताशा से सगाई कर चुका है।
फिर भी वह अपने दोस्तों के साथ टि्रप पर जाता है। इमरान लेखक है। और अपने वास्तविक पिता की तलाश में है। अर्जुन करियर व शोहरत की चाहत में सबकुछ गंवा चुका एक निराश व्यक्ति। तीनों टि्रप के लिए स्पेन चुनते हैं। वहां उन्हें लैला मिलती है। लैला से मिलने के बाद अर्जुन जिंदगी में अपने हर डर को भूल जाता है।
इमरान को अपने वास्तविक पिता की तलाश है, जो उसे स्पेन में मिलते हैं। इस सफर में वे हर काम करते हैं जिनसे वे डरते हैं। तीनों के मन से डर निकालने के लिए निर्देशक ने तीन अलग अलग एडवेंचर्स टास्क चुने हैं। सी वॉटर में जाना, ऊंचाई में सैर करना और सांड़ के रेस में भाग लेना। सभी रोमांचित लेकिन कठिनाइयों से भरे टास्क होते हैं और वे उन्हें जीते हैं।
जोया अख्तर ने बतौर निर्देशिका फिल्म में कहीं भी बोर होने का मौका नहीं दिया है। इमरान के रूप में फरहान एक बेहद शरारती इंसान है। और उसकी हरकतें दर्शकों का खूब मनोरंजन करती है। कबीर के रूप में अभय ने बेहद संजीदगी से अपना किरदार निभाया है। रितिक ने बेहतरीन अभिनय तो किया है। कै टरीना ने रोमांचित लड़की के रूप में फिट बैठी हैं। कल्की ने अपने हिस्से का किरदार बखूबी निभाया है। फिल्म के हर दृश्य में आप महसूस करेंगे कि आप स्पेन अपनी छुट्टियां बीताने आये हैं। फिल्म के टोमटिना फेस्टिवल पर आधारित गीत दर्शकों को जरूर लुभाने में कामयाब रहेगा। फरहान अख्तर की हरकतों, शरारतों व मस्ती भरे अंदाज के साथ उनका शायराना अंदाज भी दर्शकों को जरूर लुभायेगा। फिल्म के गीतों में जहां भी डांसिंग स्टेप्स की बात आयी है, वहां रितिक ने अपने कदम ताल का कमाल दिखाया है। गीत सेनोरिटा में भी तीनों दोस्ती की बांडिंग कमाल की है।
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स्पीक एशिया के सीईओ भारत छोड़ दुबई भागे
देश के 12 लाख लोगों को करोड़ों का चूना लगा चुकी स्पीक एशिया का पैसों का महल आखिरकार ढह गया। मुंबई पुलिस के हरकत में आते ही कंपनी के सीओओ के साथ टेक्निकल हेड राजीव मल्होत्रा, टेक्निकल एक्जिक्यूटिव रईस और अकाउंटेंट रवि खन्ना पुलिस के शिकंजे में आ गये। असिस्टेंट पुलिस कमिश्नर हिमांशु राय ने बताया कि ये चारों लोग 4 अगस्त तक पुलिस हिरासत में रहेंगे।
पुलिस के मुताबिक इस कंपनी ने देश के करीब 12 लाख लोगों से 1 लाख 320 करोड़ रुपए इकठ्ठा किये। कंपनी के सभी खाते फ्रीज किये जा चुके हैं। पुलिस कंपनी के अन्य लोगों की धरपकड़ के लिए संदिग्ध ठिकानों पर दबिश डाल रही है।
गौरतलब है कि स्पीक एशिया का सदस्य बनने के लिए 11 हजार रुपए देने होते हैं। उसके बाद स्पीक एशिया पर एक अकाउंट बन जाता है। हर सप्ताह एक सर्वे आपके पास आयेगा, जिसे पूरा कर आपको भेजना होता है। प्रत्येक सर्वे से प्रत्येक माह आपको 4 हजार रुपए मिलेगा। कंपनी के इसी दावे के साथ लाखों लोगों ने पैसा लगा दिया।
17 अगस्त को होगी मायावती के गांव के जमीन अधिग्रहण पर सुनवाई
शिवम् :इलाहाबाद। इलाहाबाद उच्च न्यायालय उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती के गांव बादलपुर के किसानों की भी भूमि अधिग्रहण के खिलाफ दायर याचिका पर अब सभी के साथ आगामी 17 अगस्त को ही सुनवाई करेगा।गौतमबुद्धनगर के नोयडा और ग्रेटर नोयडा में जमीन अधिग्रहण के सभी मामले की सुनवाई के लिये उच्च न्यायालय ने 17 अगस्त की तारीख तय की है 1 सभी मामलों की सुनवाई वृहद खंडपीठ करेगा जिसका गठन मुख्य न्यायाधीश एफ.आई रिबेलो करेंगे।
न्यायमूर्ति अमिताभ लाला और नयायमूर्ति अशोक श्रीवास्तव की खंडपीठ ने आज बादलपुर के किसानों की याचिका पर सुनवाई की ओर कहा कि इसे भी आगामी 17 अगस्त को अन्य गांवों के जमीन अधिग्रहण के मामले के साथ ही सुना जायेगा।
याचिका दायर कर गौतमबुद्धनगर स्थित सुश्री मायावती के बादलपुर गांव के लगभग 50 किसानों ने वहां किये गये भूमि अधिग्रहण को चुनौती दी है। ग्रामीणों का कहना है कि ग्रेटर नोएडा व प्रदेश सरकार की मिलीभगत से गांव की सैकडों एकड भूमि का अधिग्रहण गलत तरीके से किया जा रहा है। याचिका बादलपुर गांव के करतार सिंह व अन्य ने दायर की है।
गौरतलब है कि उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति अमिताभ लाला व न्यायमूर्ति अशोक श्रीवास्तव की खण्डपीठ ने 26 जुलाई को एक आदेश पर समूचे ग्रेटर नोएडा. नोएडा के अन्तर्गत आने वाली भूमि के अधिग्रहण के सभी मामले को 17 अगस्त को सुनवाई के लिए वृहदपीठ को भेज दिया था।
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