Monday, November 12, 2012

अब मोबाइल से जलेगी घर की लाइट, पानी की मोटर

अब अगर आपको अपने पानी की मोटर को चलाना है या घर के लाइट को जलाना है तो आपको बोर्ड तक जाने की जरूरत नहीं है. आप कही भी रहे, अपने मोबाइल से मोटर चालु कर सकते है तथा लाइट को जला सकते है. हैरानी की बात तो यह है कि इस प्रणाली की खोज बड़े शहरों मे रिसर्च करने वाले वैज्ञानिकों के सुविधायुक्त व महंगे लैबो में नही हुई है, बल्की इसका आविष्कार किया है गढ़वा के रहने वाले एसएसजेएस कॉलेज के 11वीं का छात्र प्रभाकर चैबे ने. प्रभाकर अपने घर के एक छोटे से कमरे में ही अपने वैज्ञानीक दिमाग से इस प्रकार की ढेरो प्रणाली विकसीत करता रहता है. इस तरह की अनोखी चीजों को देख सभी आश्चर्य हो जाते है. प्रभाकर को अपने आस-पास पड़े बेकार तार तथा जर्जर हो चुके मोबाइल सेट को लेकर रोज आविष्कार करने की आदत कक्षा सात से ही है. प्रभाकर ने मोबाइल से मिस कॉल देकर मोटर चालु करना, रिमोट कंट्रोल लाइट, पायदान पर पांव रखते ही लाइट का जलना के साथ और कई खोजे की है. प्रभाकर ने मोटर चालु करने के लिए स्वीच बोर्ड के पास एक नंबर का सिम लगा रखा है जिसपर किसी भी मोबाइल से मिस कॉल देते ही मोटर चालु हो जाता है चाहे आप कही भी हो. प्रभाकर ने बताया की उसने एक सप्ताह पुर्व फिलिप्स कंपनी का विज्ञापन पढ़ा था. उसने बताया की कंपनी इस तकनीक से लगभग 15 से 20 हजार रूपये की मुल्य पर बाजार मे लाने की योजना बना रही है. उसी तकनीक को प्रभाकर ने 700 के लागत में तैयार कर दिया है. हांलाकी प्रभाकर को अपना हुनर दिखाने के लिए कहीं भी विज्ञान प्रदर्षनी में अब तक मौका नही मिला हैं लेकीन पावर इलेक्ट्रॉनीक इंजीनीयर बनने का लक्ष्य प्रभाकर ने जरूर रखा है.
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तंबाकू निषेध के लिए राजस्व का मोह छोड़ना होगा ?

तंबाकू के इस्तेमाल से होने वाली जानलेवा बीमारियों के रोजाना बढ़ते प्रकोप के मद्देनजर सरकार की ओर से यह स्वीकार किया गया है कि इस समस्या से निपटने की राह में राजस्व का मोह बडी बाधा है। जॉन हॉपकिंग्स ब्लूमबर्ग स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ और केन्द्र सरकार की ओर से आयोजित अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में भारत सहित अन्य विकासशील देशों में तंबाकू जनित बीमारियों के बेलगाम होते प्रकोप पर चिंता जताई गई। केन्द्र और राज्य सरकारों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में दो दिन तक ले सम्मेलन के अंत में शनिवार को पारित प्रस्ताव में कहा गया कि इस समस्या से निपटने के लिए सभी राज्यों को एक साथ मिलकर तंबाकू उत्पादों के इस्तेमाल पर रोक लगानी होगी। सम्मेलन में मौजूद बिहार के शिक्षा मंत्री पी के शाही ने कहा कि उनके राज्य में तंबाकू निषेध के लिए चलाए जा रहे जागरूकता अभियान की कामयाबी में शैक्षिक एवं सामाजिक पिछड़ापन सबसे बड़ी बाधा है। इसके अलावा उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि तंबाकू उत्पादों पर प्रतबिंध के लिए किसी एक राज्य को नहीं बल्कि केन्द्र सरकार को नेतृत्व की भूमिका स्वीकार कर एक साथ पूरे देश में प्रतबिंध लगाना पड़ेगा तभी यह कारगर तौर पर लागू हो पाएगा। इस दौरान दिल्ली के खाद्य सुरक्षा आयुक्त केजेआर बर्मन ने राजधानी में दो महीने पहले ही तंबाकू उत्पादों पर लागू किए गए प्रतबिंध का हवाला देते हुए बताया कि हर संभव सख्ती के बावजूद प्रतबिंध का असर शुरुआती ही रहा। उन्होंने कहा कि पड़ोसी राज्यों से होने वाली तस्करी को रोकना प्रतबिंध की सबसे बड़ी व्यवहारिक चुनौती है। उन्होंने कहा कि ऐसे हालात में जागरूकता अभियान भी बेअसर साबित होते हैं। उत्तराखंड के स्वास्थ्य मंत्री सुरेन्द्र सिंह नेगी ने कहा कि उनके राज्य में तंबाकू उत्पादों पर प्रतबिंध की राह में सबसे बड़ी बाधा राजस्व की हानि के रूप में सामने आई। नेगी ने कहा कि लगभग 20 करोड़ रुपये प्रतिदिन राजस्व की हानि को सरकार के सहयोगी मंत्री ही स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं थे। हालांकि हॉपकिंग्स स्कूल के वैज्ञानिक बेन लोजारे ने प्रभावशाली ढंग से सरकारी प्रतिनिधियों को यह मानने पर मजबूर कर दिया सरकार को पहले यह तय करना पड़ेगा कि उनके लिए जनस्वास्थ्य जरूरी है या राजस्व। उन्होंने प्रबंधन के सूत्रों का हवाला देकर कहा कि भारत में सरकारों की इच्छा शक्ति की कमी सबसे बड़ी बाधा है, किसी भी सरकार के लिए राजस्व हानि की भरपाई के लिए तमाम रास्ते होते हैं। उन्होंने कहा कि आपको अपने ही देश के राज्य केरल से इस बारे में सीखना चाहिए जिसने राजस्व हानि और पड़ोसी राज्यों द्वारा तंबाकू उत्पादों पर प्रतबिंध न लगाने जैसी दलीलों को दरकिनार कर तंबाकू नियंत्रण के लिए इच्छा शक्ति दिखाई है। सेमिनार के अंत में राज्य और केन्द्र सरकारों के प्रतिनिधियों ने माना कि राजस्व हानि बड़ी बाधा नहीं है। साथ ही सुझाव दिया गया कि केन्द्र सरकार की पहल पर तंबाकू उत्पादों के इसतेमाल पर सामूहिक प्रतबिंध लगाना चाहिए तभी यह कारगर हो सकेगा।
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